भाजपा के कुछ नेताओं को बुद्धिमत्ता का अजीर्ण है। कुछ जन प्रतिनिधियों को पद का अहंकार है। नतीजतन जन समुदाय और मीडिया के बीच इनके बिगड़े बोल आम बात हो चली है।
उदाहरण - पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने रानी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपने ज़माने के कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना आत्मीय बता दिया। वह भी सार्वजनिक मंच से। ये अपने बेटे के विवाद संबंधी मामले में एक SDOP को भी यह कहकर धमका चुके हैं - करेरा तुम्हारे डैडी(बाप) का नहीं है। मंत्री विजय शाह इछावर गए तो महिलाओं को धमका कर आ गए। सरकारी कार्यक्रम में न गईं तो लाड़ली बहना योजना से नाम काट दिया जाएगा। पहले भी विजय शाह सोशल मीडिया में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर बेहद भद्दी टिप्पणी कर चुके हैं। फल स्वरुप इन्हें अदालती प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है, भाजपा को राजनीतिक और संवैधानिक मंच पर सफाई देनी पड़ रही है सो अलग।
भागीरथपुरा दूषित जल कांड कौन भूल सकता है। वहां एक पत्रकार की ओर से कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर सवाल उठा तो कैबिनेट मंत्री पत्रकार पर टूट पड़े - तुम क्या घंटा उस जगह होकर आए हो। उनके इस असंयमित बयान ने विपक्षियों को लंबे समय तक भाजपा और उसकी सरकार के खिलाफ घंटा बजाने का अवसर प्रदान कर दिया। मध्य प्रदेश शासन की एक और मंत्री प्रतिमा बागरी का भाई गांजे की तस्करी में पकड़ा गया तो मीडिया में आपा खो बैठीं। फल स्वरुप विभिन्न न्यूज़ चैनलों पर हंसी का पात्र बनी और विपक्ष में मामले को तूल दिया सो अलग।
इन सबसे बड़े बयानवीर गुना विधायक पन्ना लाल शाक्य निकले। गुना के मंडी प्रांगण में बलराम महोत्सव था, हमेशा की तरह इस बार भी विषय से भटक गए। बोले एक सीता की वजह से रामायण में और एक पांचाली की वजह से महाभारत में करोड़ों पुरुष मारे गए। जबकि लड़ाई के केन्द्र में महिला ही थी, महिला एक भी नहीं मरी। पृथ्वीराज चौहान के मामले में भी संयोगिता को कुख्यात बना डाला। घोर आश्चर्य! भाजपा के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि महिलाओं के खिलाफ की गई इस टिप्पणी के खिलाफ कुछ ना बोले और मुंह में दही जमाए बैठे रहे। किंतु चाचौड़ा की युवा विधायक श्रीमती प्रियंका मीणा को अपनी ही पार्टी के विधायक पन्नालाल शाक्य का अनर्गल प्रलाप सहन नहीं हुआ। उन्होंने विधायक के आपत्तिजनक कथन का बेहद शालीनता से विरोध किया और कहा वक्त पड़ने पर महिलाओं ने भी बढ़-चढ़ कर बलिदान दिए हैं। शायद उनका संकेत रानी लक्ष्मी बाई, अहिल्या बाई, रानी दुर्गावती, जीजा बाई, पन्ना धाई, झलकारी बाई, राजमाता श्रीमंत विजयराजे सिंधिया की ओर रहा होगा। सहन नहीं हुआ विधायक को, बोले- बैठ जाओ अपनी जगह पर। हमने बहुत पढ़ाई की है। श्रीमती प्रियंका मीणा के मुखर होने से मौके पर मौजूद वे महिला जनप्रतिनिधि और भाजपा की महिला पदाधिकारी बेहद खुश हुईं जो अब तक लोक लाज के भय से चुप बैठी थीं। फल स्वरुप MLA की फजीहत सुनिश्चित हो गई।
विवादों से नाता बनाए रखना इनका पुरान शगल है। शायद जानते हैं, ऊटपटांग बोलने वालों को मीडिया ज्यादा हाइलाइट करता है।
कुछ बानगियां - गुना PG कॉलेज के उद्घाटन समारोह में छात्रों को पढ़ने की बजाय पंचर जोड़ने की दुकान खोलने की मंच से सलाह दे बैठे।
यह भी कहा कि साल में चार बार देवियों की पूजा होती है, फिर कैसे मान लें, कि नारियों पर अत्याचार होता है। एक बार बोले- लड़कियों पर अत्याचार इसलिए होते हैं, क्योंकि ये खुद बॉयफ्रेंड बनाती फिरती हैं।
ये गुना के निवासियों की विडम्बना ही है कि उनके सामने कम खराब को चुनने का विकल्प ही बना हुआ है। पहले भी MLA रह चुके पन्नालाल क्रमशः अगले चुनाव में टिकट नहीं पा सके थे। क्योंकि तत्समय उनकी रेटिंग निगेटिव थी। मजबूर होकर पार्टी ने गुना के ही विधानसभा चुनाव में अपना पर्चा निरस्त करा चुके गोपी लाल जाटव पर दांव लगाया, जीते। उनकी रेटिंग और ज्यादा खराब हो गई तो कम खराब, यानि फिर पन्ना लाल को टिकट देना पड़ गया। उम्मीद थी वाणी पर संयम साध लेंगे, किंतु पूंछ सीधी होती है क्या?
उदाहरण - पिछोर विधायक प्रीतम लोधी ने रानी अहिल्याबाई होल्कर की जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में अपने ज़माने के कुख्यात डकैत रामबाबू गड़रिया को अपना आत्मीय बता दिया। वह भी सार्वजनिक मंच से। ये अपने बेटे के विवाद संबंधी मामले में एक SDOP को भी यह कहकर धमका चुके हैं - करेरा तुम्हारे डैडी(बाप) का नहीं है। मंत्री विजय शाह इछावर गए तो महिलाओं को धमका कर आ गए। सरकारी कार्यक्रम में न गईं तो लाड़ली बहना योजना से नाम काट दिया जाएगा। पहले भी विजय शाह सोशल मीडिया में कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर बेहद भद्दी टिप्पणी कर चुके हैं। फल स्वरुप इन्हें अदालती प्रक्रिया का सामना करना पड़ रहा है, भाजपा को राजनीतिक और संवैधानिक मंच पर सफाई देनी पड़ रही है सो अलग।
भागीरथपुरा दूषित जल कांड कौन भूल सकता है। वहां एक पत्रकार की ओर से कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पर सवाल उठा तो कैबिनेट मंत्री पत्रकार पर टूट पड़े - तुम क्या घंटा उस जगह होकर आए हो। उनके इस असंयमित बयान ने विपक्षियों को लंबे समय तक भाजपा और उसकी सरकार के खिलाफ घंटा बजाने का अवसर प्रदान कर दिया। मध्य प्रदेश शासन की एक और मंत्री प्रतिमा बागरी का भाई गांजे की तस्करी में पकड़ा गया तो मीडिया में आपा खो बैठीं। फल स्वरुप विभिन्न न्यूज़ चैनलों पर हंसी का पात्र बनी और विपक्ष में मामले को तूल दिया सो अलग।
इन सबसे बड़े बयानवीर गुना विधायक पन्ना लाल शाक्य निकले। गुना के मंडी प्रांगण में बलराम महोत्सव था, हमेशा की तरह इस बार भी विषय से भटक गए। बोले एक सीता की वजह से रामायण में और एक पांचाली की वजह से महाभारत में करोड़ों पुरुष मारे गए। जबकि लड़ाई के केन्द्र में महिला ही थी, महिला एक भी नहीं मरी। पृथ्वीराज चौहान के मामले में भी संयोगिता को कुख्यात बना डाला। घोर आश्चर्य! भाजपा के अनेक वरिष्ठ पदाधिकारी और जनप्रतिनिधि महिलाओं के खिलाफ की गई इस टिप्पणी के खिलाफ कुछ ना बोले और मुंह में दही जमाए बैठे रहे। किंतु चाचौड़ा की युवा विधायक श्रीमती प्रियंका मीणा को अपनी ही पार्टी के विधायक पन्नालाल शाक्य का अनर्गल प्रलाप सहन नहीं हुआ। उन्होंने विधायक के आपत्तिजनक कथन का बेहद शालीनता से विरोध किया और कहा वक्त पड़ने पर महिलाओं ने भी बढ़-चढ़ कर बलिदान दिए हैं। शायद उनका संकेत रानी लक्ष्मी बाई, अहिल्या बाई, रानी दुर्गावती, जीजा बाई, पन्ना धाई, झलकारी बाई, राजमाता श्रीमंत विजयराजे सिंधिया की ओर रहा होगा। सहन नहीं हुआ विधायक को, बोले- बैठ जाओ अपनी जगह पर। हमने बहुत पढ़ाई की है। श्रीमती प्रियंका मीणा के मुखर होने से मौके पर मौजूद वे महिला जनप्रतिनिधि और भाजपा की महिला पदाधिकारी बेहद खुश हुईं जो अब तक लोक लाज के भय से चुप बैठी थीं। फल स्वरुप MLA की फजीहत सुनिश्चित हो गई।
विवादों से नाता बनाए रखना इनका पुरान शगल है। शायद जानते हैं, ऊटपटांग बोलने वालों को मीडिया ज्यादा हाइलाइट करता है।
कुछ बानगियां - गुना PG कॉलेज के उद्घाटन समारोह में छात्रों को पढ़ने की बजाय पंचर जोड़ने की दुकान खोलने की मंच से सलाह दे बैठे।
यह भी कहा कि साल में चार बार देवियों की पूजा होती है, फिर कैसे मान लें, कि नारियों पर अत्याचार होता है। एक बार बोले- लड़कियों पर अत्याचार इसलिए होते हैं, क्योंकि ये खुद बॉयफ्रेंड बनाती फिरती हैं।
ये गुना के निवासियों की विडम्बना ही है कि उनके सामने कम खराब को चुनने का विकल्प ही बना हुआ है। पहले भी MLA रह चुके पन्नालाल क्रमशः अगले चुनाव में टिकट नहीं पा सके थे। क्योंकि तत्समय उनकी रेटिंग निगेटिव थी। मजबूर होकर पार्टी ने गुना के ही विधानसभा चुनाव में अपना पर्चा निरस्त करा चुके गोपी लाल जाटव पर दांव लगाया, जीते। उनकी रेटिंग और ज्यादा खराब हो गई तो कम खराब, यानि फिर पन्ना लाल को टिकट देना पड़ गया। उम्मीद थी वाणी पर संयम साध लेंगे, किंतु पूंछ सीधी होती है क्या?
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