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नया खुलासा ! दिग्विजय सिंह ने क्यों दिया राम मंदिर का चंदा ?

श्री राम मंदिर निर्माण के लिए दिए गए चंदे का निरंतर ढोल पीटते और दान की राशि वापस मांगते दिग्विजय सिंह सोशल मीडिया पर आरोपों प्रत्यारोपों का विषय बने हुए हैं। विषय इसलिए क्योंकि स्वयं को सबसे ज्यादा प्रखर हिंदू बताने वाले दिग्गी राजा यह सर्वथा भूल ही गए कि जो असल सनातनी है वह एक बार दान कर दी गई वस्तु को कभी भी वापस नहीं मांगता। दूसरी बात यह कि लोग मानने लगे हैं, राजा साहब ने यह कथित दान केवल विवाद पैदा करने के लिए ही दिया था। शायद वह आश्वस्त थे कि एक मौका ऐसा भी आएगा जब अयोध्या मंदिर के खिलाफ वातावरण निर्मित करने की गुंजाइश पैदा होगी। तब उनके द्वारा दिया गया चंदा उन्हें धर्म रक्षा यात्रा करने का अवसर प्रदान करने के काम आएगा, और ऐसा हो भी रहा है। तीसरी बात यह कि श्री सिंह द्वारा चंदा इसलिए भी दिया गया ताकि समय-समय पर खुद को दानदाता बता कर वे गाहे बगाहे मंदिर प्रबंधन से हिसाब मांगने का स्वांग रचते रहें और मंदिर के खिलाफ वातावरण निर्मित करते रहें, ऐसा हो भी रहा है। क्योंकि यदि दान नहीं देते तो पूछ कैसे पाते ? हर कोई सवाल उठता, जब दान दिया नहीं तो आप पूछने वाले कौन होते हैं ? संभवतः इन सवालों से बचने के लिए ही दान दिया गया। 
चौथी बात, जैसा कि खुद दिग्विजय सिंह का कहना है - उन्होंने राम मंदिर निर्माण का चंदा दिया तो जाहिर है विश्व हिंदू परिषद को ही दिया होगा। यदि हां तो यह उनका विरोधाभासी व्यवहार है। क्योंकि वे सदैव कहते रहे हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ गैर पंजीकृत संगठन है। आप उसे गैर कानूनी यानि कि अवैध भी ठहराते रहे हैं। तो एक सवाल यह भी उठता है कि संघ के ही अनुषांगिक संगठन विश्व हिंदू परिषद को चंदा देना दिग्विजय सिंह जी को रास आया कैसे ? यही उनकी विरोधाभासी कार्य प्रणाली है। कितने आश्चर्य की बात है कि जो आदमी विधायक, सांसद, काबीना मंत्री और एक सूबे का मुख्यमंत्री रहा हो, वह एक संगठन को गैर कानूनी बताए और उसे दान भी दे दे, बात हजम नहीं होती। 

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जाहिर है इतनी बड़ी गलती उनके द्वारा अकारण तो होने से रही। जरूर इसके पीछे कोई बड़ी छुपी हुई रणनीति रही होगी, जो अब दिख भी रही है।
 तस्वीर साफ है। दिग्विजय सिंह हों या फिर अयोध्या राम मंदिर की छवि खराब करने में जुटे अन्य कालनेमि, सब के सब सुनियोजित रणनीति के तहत दीर्घकालीन साझा अभियान छेड़े हुए हैं, जो अब साकार होते दिख रहे हैं।
 अंत में केवल इतना कहूंगा कि चोरी जिसने भी की और जिसने भी कराई, मंदिर की छवि धूमिल करने में जो जो शामिल हैं, उन्हें मोदी और योगी छोड़ने नहीं वाले।
मोहनलाल मोदी
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