जय श्री राम,
आप हमारे लिए सम्माननीय हैं। इसलिए नहीं कि आप एक बड़े नेता हैं।ना इसलिए कि आप 10 सालों तक प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे। बल्कि इसलिए कि आप पीपाजी महाराज के वंशज हैं। आपके पूर्वजों को हिंदूपत की उपाधि रही है। आप जिस नगरी के राजा रहे वह राघौजी महाराज के नाम से विभूषित है। घोषणा हुई है कि आप धर्म रक्षा हेतु महाकाल से अयोध्या तक पदयात्रा करने जा रहे हैं। आप श्री राम जन्मभूमि कार सेवकों और संघ प्रमुख श्री मोहन भागवत जी को यात्रा में सहभागितार्थ आमंत्रित करने की मंशा रखते हैं, यह भी स्वागतेय। कार सेवक अथवा भागवत जी आएंगे या नहीं, मुझे नहीं पता। लेकिन मैं संघ के भगवा ध्वज को त्याग कर आपकी यात्रा में आने को तत्पर हूं। बस मेरा एक निवेदन है, उसे सहृदयता पूर्वक स्वीकार कीजिए ।
कृपया यह बताएं कि जब आप ही की पार्टी अदालत में श्री राम को काल्पनिक बता रही थी तब एक जागृत हिंदू (आपके अनुसार सनातनी) होने के नाते, पीपा जी महाराज और हिंदूपत उपाधि से विभूषित गौरवशाली वंश का वंशज होने के नाते, आपने अपनी पार्टी का किंचित मात्र भी विरोध किया था क्या ? यदि नहीं तो क्यों ? क्या आप भी श्री राम को काल्पनिक ही मान रहे थे? यदि हां तो फिर अचानक यह हृदय परिवर्तन कैसे ? कैसे आपको अचानक श्री राम जी के अस्तित्व में विश्वास हो गया ? जिन कारसेवकों को आप अपनी यात्रा में बुला रहे हैं, उन्हीं के अनगिनत राम भक्त साथियों को गोलियों से भून दिया गया। क्या आप दावा कर सकते हैं कि आपने स्वप्न में भी गोलियां चलवाने वाले आपके राजनैतक सखा मुलायम सिंह की एक बार भी आलोचना की हो। यदि उपरोक्त सवालों के सिलसिले बार जवाब आपके पास संतोषजनक हैं तो मैं 1975 से अब तक का स्वयंसेवक होने का गौरव त्याग कर आपकी यात्रा में शामिल होने आ रहा हूं। और हां, यदि जवाब श्री राम और बलिदानी कार सेवकों के प्रति सकारात्मक रहे तो अन्य स्वयंसेवक साथियों से भी आग्रह करूंगा कि वे भी आपकी यात्रा को सफल बनाने में जुट जाएं।
राजा साहब मैं जानता हूं आपके पास इन सवालों के जवाब नहीं है और मुझे मिलेंगे भी नहीं। क्योंकि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल और भाजपा का विरोध करते-करते आप नकारात्मकता के इतने वशीभूत हो गए कि अपने श्री राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन का विरोध करना अपना धर्म मान लिया। वह भी केवल इसलिए क्योंकि उक्त आंदोलन की धर्म ध्वजा संघ ने प्रमुख रूप से थाम रखी थी। आपने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उसके अनुषांगिक संगठनों का विरोध किया, स्वीकार है। आपने बीजेपी का विरोध किया, यह भी आपका संविधान प्रदत्त अधिकार है। लेकिन संगठनों का विरोध करते-करते आप विरोधी राजनीति के इतने वशीभूत हुए की श्री राम जन्मभूमि आंदोलन और श्री राम मंदिर निर्माण तक का विरोध करने लग गए, यह अस्वीकार है। वर्ना आप अपना एक भी बयान ऐसा बता दें कि आपने भूल से भी श्री राम जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन और भव्य राम मंदिर निर्माण का समर्थन किया हो। क्या विरोध केवल इसलिए कि जन्मभूमि मुक्ति आंदोलन और मंदिर निर्माण की ध्वजा संघ के हाथ में थी और भाजपा इसका अनुसरण कर रही थी। मान लेते हैं आपको संघ भाजपा से नफरत है, तो आप अलग से जन्मभूमि आंदोलन की अलख जगा सकते थे। राजनीतिक सांगठनिक और आर्थिक रूप से तो आप कभी भी कमजोर नहीं रहे। आखिर शिवसेना हिंदू महासभा और अनेक हिंदू संगठन भी तो संत समाज के साथ मंदिर आंदोलन में भाग ले ही रहे थे ना ! लेकिन जब जन्मभूमि मुक्त हो गई, भव्य राम मंदिर बन गया और अब चंदा चोरी जैसी मनमाफिक घटना घट गई, तब आपको धर्म रक्षा यात्रा निकालने की सूझी है। यदि वाकई में आप अपने पूर्वजों की भांति राम भक्त थे तो 90 के दशक में भी एक यात्रा श्री राम जन्मभूमि के पक्ष में अलग से निकाल सकते थे। तब जब आपका राजनैतिक परम प्रिय सखा मुलायम कार सेवकों की छाती पर गोलियां चलवा रहा था।
राजा साहब, हम मानते हैं कि मंदिर प्रबंधन से चूक हुई है। ठीक वैसे जैसे सीता माता मायावी राक्षस को स्वर्ण मृग मान बैठीं और साधु वेश में आया रावण उनका अपहरण करने में सफल हो गया। किंतु परेशान ना हों, श्री राम और श्री लक्ष्मण के परम भक्त मोदी और योगी के हाथों स्वर्ण मृग भी मरेगा और रावण का भी अंत होगा। श्री राम जी की सौगंध खाकर सही-सही जवाब देंगे तो यकीन दिलाता हूं, मैं संघ को त्याग कर मित्रों सहित आपकी कथित धर्म यात्रा में आ रहा हूं।
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