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BJP के व्यापक स्वरूप की मजबूत नींव, उसके नेताओं कार्यकर्ताओं का बलिदान

भाजपा के व्यापक स्वरूप की मजबूत नींव, उसके कार्यकर्ताओं का बलिदान 

(भाजपा स्थापना दिवस 6 अप्रैल पर विशेष)

डॉक्टर राघवेंद्र शर्मा।
6 अप्रैल 1980 को स्थापित भारतीय जनता पार्टी आज न केवल भारत बल्कि विश्व के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में अपनी पहचान बना चुकी है। 14 करोड़ से अधिक समर्पित सदस्यों का विशाल परिवार और देश के 19 राज्यों व दो केंद्र शासित प्रदेशों में एनडीए की सरकारें इस दल की अजेय यात्रा का जीवंत प्रमाण हैं। विशेष रूप से 14 राज्यों में भाजपा का अपने दम पर शासन करना और केंद्र में बीते 12 वर्षों से एक स्थिर व निर्णायक सरकार का संचालन करना किसी चमत्कार से कम नहीं लगता, किंतु इन उपलब्धियों के पीछे 75 वर्षों का अनवरत संघर्ष, बलिदान और वैचारिक अडिगता छिपी है। 
यद्यपि भाजपा का औपचारिक गठन 1980 में हुआ, परंतु इसकी वैचारिक बुनियाद 21 अक्टूबर 1951 को भारतीय जनसंघ के रूप में उसी दिन पड़ गई थी जब डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और बलराज मधोक जैसे मनीषियों ने राष्ट्रवाद को सर्वोपरि मानकर एक वैकल्पिक राजनीति की मशाल जलाई थी। वह कालखंड ऐसा था जब तत्कालीन नेहरू सरकार असाधारण बहुमत के मद में निरंकुशता की ओर बढ़ रही थी और तुष्टिकरण की नीतियों के कारण राष्ट्र की सुरक्षा व स्वाभिमान दांव पर लगा था। पाकिस्तान के प्रति नरम रवैया और नेहरू-लियाकत समझौते ने जब देश की अखंडता को चुनौती दी, तब जनसंघ ने धर्मनिरपेक्षता के छद्म आवरण को हटाकर सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का संकल्प लिया। उस समय डॉ. मुखर्जी ने 'एक देश में दो निशान, दो विधान और दो प्रधान' के विरुद्ध जो शंखनाद किया, वह भारतीय राजनीति में राष्ट्रभक्ति की सबसे बुलंद आवाज बनी। इसी उद्देश्य के लिए डॉ. मुखर्जी ने अपना सर्वोच्च बलिदान दिया और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने एकात्म मानववाद के दर्शन के माध्यम से अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति के उत्थान का मार्ग प्रशस्त किया, हालांकि उन्हें भी विरोधियों के षड्यंत्रों के कारण अपनी जान गंवानी पड़ी।
​भारतीय जनसंघ और बाद में भाजपा का इतिहास सत्ता प्राप्ति का नहीं, बल्कि लोकतंत्र की रक्षा का इतिहास रहा है। 1977 में जब कांग्रेस सरकार ने आपातकाल के माध्यम से लोकतंत्र की हत्या करने का प्रयास किया, तब जनसंघ ने राष्ट्रहित में अपना अस्तित्व तक मिटा दिया और जनता पार्टी में विलय कर लिया। यह त्याग अतुलनीय था।
किंतु जब आपसी महत्वाकांक्षाओं और कांग्रेसी षड्यंत्रों के कारण जनता सरकार गिरी, तब 6 अप्रैल 1980 को अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी का उदय हुआ। नाम बदला, स्वरूप बदला, लेकिन संकल्प वही पुराने रहे—अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण, अनुच्छेद 370 की समाप्ति और समान नागरिक संहिता का क्रियान्वयन। भाजपा ने हार नहीं मानी और 'अंधेरा छंटेगा, सूरज निकलेगा, कमल खिलेगा' के अटल जी के उद्घोष को चरितार्थ कर दिखाया। 90 के दशक में जब पहली बार भाजपा नीत सरकार बनी, तो उसे अस्थिर करने के अनेक प्रयास हुए, परंतु अटल जी के नेतृत्व ने यह सिद्ध कर दिया कि एक गैर-कांग्रेसी सरकार भी सुशासन के साथ अपना कार्यकाल पूरा कर सकती है। स्वर्णिम चतुर्भुज योजना, नदियों को जोड़ने की पहल और परमाणु परीक्षण जैसे साहसी कदमों ने भारत को विकास की नई ऊंचाई पर खड़ा कर दिया।
​2014 का वर्ष भारतीय राजनीति के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ जब नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा को ऐतिहासिक बहुमत प्राप्त हुआ। प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता संभालने के बाद भारत की दशा और दिशा दोनों में आमूलचूल परिवर्तन आया। जो संकल्प दशकों पहले जनसंघ के समय लिए गए थे, वे एक-एक कर पूर्ण होने लगे। कश्मीर से धारा 370 का धराशायी होना और अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण करोड़ों भारतीयों के सांस्कृतिक गौरव की पुनर्स्थापना थी। इसके साथ ही, सामाजिक न्याय की दिशा में कदम बढ़ाते हुए मुस्लिम बहनों को तीन तलाक के अभिशाप से मुक्ति दिलाई गई और कई राज्यों में समान नागरिक संहिता की ओर बढ़ते कदम पार्टी की वैचारिक दृढ़ता को दर्शाते हैं। वर्तमान सरकार ने 'सबका साथ, सबका विकास' के मंत्र को धरातल पर उतारते हुए आयुष्मान भारत, उज्ज्वला योजना, किसान सम्मान निधि और पीएम आवास योजना जैसी लोक-कल्याणकारी नीतियों से समाज के गरीब तबके का जीवन बदल दिया है। डिजिटलाइजेशन और 'मेक इन इंडिया' जैसे अभियानों ने भारत को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया है, जिससे आज भारत विश्व की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा द्वारा शासित ​आज का 'नया भारत' केवल आंतरिक रूप से मजबूत नहीं है, बल्कि वैश्विक पटल पर भी अपनी धाक जमा चुका है। भाजपाई प्रधानमंत्री श्री मोदी की 'विश्व बंधुत्व' की विदेश नीति ने जहां मित्र देशों की संख्या बढ़ाई है, वहीं सामरिक मोर्चे पर भारत अब दुश्मन को उसके घर में घुसकर मुंहतोड़ जवाब देने का साहस दिख रहा है। विकसित भारत 2047 का लक्ष्य केवल एक नारा नहीं, बल्कि 140 करोड़ भारतीयों का साझा संकल्प बन चुका है। भाजपा की यह यात्रा शून्य से शिखर तक की वह कहानी है, जिसे कार्यकर्ताओं के पसीने और नेतृत्व के विजन ने लिखा है। यह जनता के अटूट विश्वास और आशीर्वाद का ही प्रतिफल है कि आज कमल की सुगंध देश के कोने-कोने में फैल रही है। जनसंघ से भाजपा तक का यह सफर इस बात का प्रमाण है कि यदि उद्देश्य पवित्र हो और राष्ट्रभक्ति अटूट हो, तो कोई भी बाधा मार्ग नहीं रोक सकती। भारतीय जनता पार्टी आज केवल एक राजनीतिक दल नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की आशाओं और आकांक्षाओं का संवाहक बन चुकी है, जो भारत को पुनः विश्व गुरु के पद पर आसीन करने के लिए निरंतर संकल्पित है।
लेखक अनेक स्वयंसेवी, समाजसेवी संस्थाओं के केंद्र बिंदु, प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मन की बात के प्रदेश संयोजक, सामाजिक राजनीतिक एवं धार्मिक साहित्य के सृजन कर्ता हैं।
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