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​भोपाल में रचा जाएगा इतिहास 100 घंटे तक बिना रुके

हौसले और समानता का 
रोमांचक महाकुंभ 22 फरवरी से 

भोपाल। ​मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल एक बार फिर मानवीय जिजीविषा, अदम्य साहस और खेल भावना के एक ऐसे अनूठे संगम का गवाह बनने जा रही है, जो न केवल प्रदेश बल्कि देश के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होगा। 'टास्क इंटरनेशनल सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च' के तत्वावधान में आयोजित होने जा रहा  'दिव्यजन खेल महोत्सव-2026' केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि दिव्यांगजनों के सामर्थ्य का एक उद्घोष है।
​यह आयोजन 22 फरवरी 2026 को सुबह 10 बजे से भोपाल के नेहरू नगर स्थित पुलिस ग्राउंड में शुरू होगा। इस महोत्सव की सबसे बड़ी विशेषता इसका 'नॉन-स्टॉप' स्वरूप है—यह खेल महाकुंभ लगातार 100 घंटों तक बिना रुके, बिना थके चलेगा।

​ *हौसलों की उड़ान
100 घंटे का अखंड संकल्प*
​अक्सर खेलों में जीत-हार की चर्चा होती है, लेकिन यहाँ चर्चा संकल्प की है। संस्था के मुख्य मार्गदर्शक और आयोजन के सूत्रधार डॉ. राघवेंद्र शर्मा के नेतृत्व में यह अनूठा प्रयोग किया जा रहा है। 100 घंटे तक लगातार खेल जारी रखना किसी भी सामान्य एथलीट के लिए चुनौतीपूर्ण होता है, लेकिन यहाँ मैदान में वे खिलाड़ी होंगे जो अपनी शारीरिक बाधाओं को अपने हौसले के सामने बौना साबित कर चुके हैं।
​डॉ. राघवेंद्र शर्मा का मानना है कि दिव्यांगों के प्रति समाज का दृष्टिकोण केवल सहानुभूति तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उनकी क्षमताओं को पहचान कर उन्हें मुख्यधारा में समान अवसर मिलने चाहिए। यह 100 घंटे का 'मैराथन खेल आयोजन' इसी दिशा में एक बड़ा कदम है।

​ *अभिनव प्रयोग, समानता 
का नया धरातल* 
​इस खेल महोत्सव की एक और सबसे क्रांतिकारी विशेषता इसका 'यूनिफाइड स्पोर्ट्स मॉडल' है। इस महोत्सव में दिव्यांग खिलाड़ियों के साथ सामान्य खिलाड़ी भी कंधे से कंधा मिलाकर मैदान में उतरेंगे। लेकिन यहाँ एक दिलचस्प और चुनौतीपूर्ण शर्त रखी गई है—सामान्य खिलाड़ियों को भी उन्हीं नियमों के तहत खेलना होगा जो दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए निर्धारित हैं।
​"यदि क्रिकेट का मैच दृष्टिबाधित नियमों के तहत हो रहा है, तो सामान्य खिलाड़ी को भी आंखों पर पट्टी बांधकर या उन्हीं विशेष परिस्थितियों में खेलना होगा। यह प्रयोग सामान्य वर्ग के खिलाड़ियों और दर्शकों को यह महसूस कराएगा कि एक दिव्यांग खिलाड़ी किन चुनौतियों का सामना करते हुए उत्कृष्ट प्रदर्शन करता है।" - आयोजन समिति
​यह अभिनव प्रयोग समाज में संवेदनशीलता और समानता के भाव को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। यह संदेश देगा कि प्रतिभा किसी अंग की मोहताज नहीं होती, बल्कि सही नियमों और अवसर मिलने पर हर व्यक्ति विजेता बन सकता है।

​ *युद्ध स्तर पर तैयारियाँ 
और विश्वस्तरीय सुविधाएँ* 
​इतने बड़े पैमाने पर आयोजित होने वाले इस 100 घंटे के महाकुंभ के लिए नेहरू नगर का पुलिस ग्राउंड पूरी तरह से सजने को तैयार है। आयोजन की तैयारियाँ युद्ध स्तर पर की जा रही हैं। खिलाड़ियों के आगमन, उनके ठहरने, पौष्टिक आहार और चिकित्सीय सुविधाओं के लिए विशेष समन्वय टीमें बनाई गई हैं।
दिव्यांग खिलाड़ियों की विशेष जरूरतों को ध्यान में रखते हुए 'बैरियर-फ्री' (बाधा रहित) आवास की व्यवस्था की गई है।
​सुरक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था के तहत मैदान पर 24 घंटे मेडिकल टीमें, फिजियोथेरेपिस्ट और एम्बुलेंस की सुविधा उपलब्ध रहेगी ताकि 100 घंटे के इस लंबे सफर में खिलाड़ियों के स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जा सके।
​सुविधाओं का संयोजन अंतर्गत अत्याधुनिक स्पोर्ट्स गियर और तकनीकी उपकरणों का उपयोग किया जा रहा है ताकि खेल का स्तर अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हो।
​विभिन्न विधाओं में दिखेगा दम - ​इस महोत्सव में मध्यप्रदेश सहित देशभर की विभिन्न दिव्यांग टीमों के भाग लेने की संभावना है। इसमे कई रोमांचक खेल आयोजित होंगे। 100 घंटे की इस निरंतरता में दर्शकों को हर समय मैदान पर ऊर्जा और उत्साह का संचार देखने को मिलेगा।
 *​खेल प्रेमियों से भावुक अपील -* ​आयोजन समिति ने राजधानी भोपाल सहित पूरे प्रदेश के खेल प्रेमियों से इस ऐतिहासिक पल का साक्षी बनने की अपील की है। समिति का भरोसा है कि जब भोपाल की जनता भारी संख्या में पुलिस ग्राउंड पहुंचेगी, तो दर्शकों की तालियाँ उन दिव्यांग खिलाड़ियों की ऊर्जा को दोगुना कर देंगी जो दिन के साथ-साथ रात के सन्नाटे में भी मैदान पर पसीना बहा रहे होंगे।
​यह आयोजन समाज के लिए एक सीख है कि बाधाएं मानसिक होती हैं, शारीरिक नहीं। के रूप में स्थापित करेगा। ​'दिव्यजन खेल महोत्सव-2026' आने वाले समय में समावेशी खेलों के लिए एक वैश्विक बेंचमार्क स्थापित कर सकता है। डॉ. राघवेंद्र शर्मा और उनकी टीम का यह प्रयास न केवल मध्यप्रदेश को खेलों के मानचित्र पर चमकाएगा, बल्कि लाखों दिव्यांग युवाओं के मन में यह विश्वास पैदा करेगा कि वे भी असंभव को संभव कर सकते हैं।
​तो तैयार हो जाइए, 22 फरवरी की सुबह 10 बजे भोपाल के नेहरू नगर पुलिस ग्राउंड में इतिहास को बनते देखने के लिए। यहाँ हार-जीत तो एक पक्ष है, लेकिन असली विजेता वह 'जज्बा' होगा जो 100 घंटों तक मशाल की तरह जलता रहेगा।

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