कांग्रेस को अब राजस्थान में परेशानियां

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राजस्थान में परेशानियां, विधायकों के थोक दल बदल की आशंका

कवायदों के केंद्र में सचिन पायलट का नाम

राजस्थान में परेशानियां : विधायकों के थोक दल बदल की आशंका, विधायकों के थोक दल बदल की आशंका

कोटा। मध्य प्रदेश में सत्ता से बाहर हो चुकी कांग्रेस के लिए अब राजस्थान में परेशानियां खड़ी होती नजर आ रही हैं। परेशानी ये है कि यहां पर भी मध्य प्रदेश की तर्ज पर थोक विधायकों के दल बदल की आशंकाएं प्रबल हो गई हैं। इन कवायदों की धुरी में पार्टी के युवा नेता सचिन पायलेट को देखा जा रहा है।

कारण यह बताया जा रहा है कि कांग्रस ने सत्ता पाने के लिए विधान सभा चुनाव में वहां पर सचिन पायलट का युवा और निर्विवाद चेहरा आगे किया तथा बहुमत मिलते ही सत्ता की कमान बुजुर्ग हो चुके अशोक गहलोत के हाथों में सौंप दी। याद दिला दें कि मध्य प्रदेश में भी कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ यही खेल खेला था।

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बाद में भी विकास कार्यों को लेकर उनकी अनदेखी की गई। नतीजा ये हुआ कि मध्य प्रदेश में पंद्रह साल बाद मुश्किल से सत्ता हासिल करने वाली कांग्रेस सहज ही सत्ता से बाहर चली गई। अब लगातार खबरें आ रही है कि राजस्थान के उप मुख्य मंत्री सचिन पायलट के संबन्ध भारतीय जनता पार्टी के नेताओं से निकटतम होते जा रहे हैं।

आशंकाओं को इस बात से भी प्रामाणिकता हासिल होती है कि राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस पार्टी की ओर से मुख्य सचेतक एवं वरिष्ठ विधायक महेश जोशी ने वहां के पुलिस महानिदेशक को एक पत्र लिखकर बताया है कि मध्य प्रदेश व गुजरात की तर्ज पर राजस्थान में भी कुछ कांग्रेसी विधायकों को एवं अशोक गहलोत सरकार को समर्थन कर रहे निर्दलीय विधायकों को प्रलोभन देने का प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने दावा किया है कि राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार को अपदस्थ करने के लिए विधायकों की खरीद फरोख्त की जा रही है। जोशी ने ऐसी कोशिश करने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की है। कांग्रेस पार्टी ने अपनी शिकायत में किसी का नाम नहीं लिखा है लेकिन फिर भी कयास लगाए जा रहे हैं कि जो नाम नहीं लिखा गया है वह सचिन पायलट है।

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इसके पीछे कुछ तर्क भी है। राजस्थान चुनाव में सचिन पायलट कांग्रेस का चेहरा थे परंतु बहुमत के निकट पहुंचते ही अशोक गहलोत मुख्यमंत्री बन बैठे। मध्य प्रदेश में नाथ और सिंधिया की तरह राजस्थान में भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच रिश्ते काफी कड़वे हो गए हैं।

कांग्रेस को सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया भारतीय जनता पार्टी में शामिल होने के बाद भी सचिन पायलट के सतत संपर्क में बने हुए है । राजस्थान के इस सियासी वातावरण को कांग्रेस में युवाओं की अवमानना के रूप में देखा जा रहा है।

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