नया शिगूफा, भाजपा निराश कर रही सिंधिया को

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भाजपा की रैली सफल बनाने की अपील

सिंधिया के ट्विटर हैंडल से हट गई भाजपा!

ग्वालियर। सियसी साजिशों के तहत अचानक सियासी गलियारों में यह अटकलें तेज हो गई हैं- क्या भाजपा (BJP) भी ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya scindia) को निराश कर रही है? ये अटकलें उन चर्चाओं से जन्मी हैं, जिनमें दावा किया जा रहा है कि श्री सिंधिया ने अपने ट्विटर हैंडल (Twitter Handle) से भाजपा का नाम हटा दिया है। याद दिला दें कि सिंधिया ने अपनी अनदेखी का इस प्रकार का संकेत तब दिया था जब वे कांग्रेस (Congress) में हुआ करते थे और पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव पद पर आसीन थे।

तब उन्होंने अपनी लगातार हो रही अनदेखी के चलतेे खुद के ट्विटर हैंडल से कांग्रेस का नाम और पद विलोपित कर दिया था। उसकी जगह पर उन्होंने अपने परिचय में जनता का सेवक और क्रिकेट प्रेमी जोड़ दिया था। अब अफवाहें फैलाई जा रही हैं कि उन्होंने इस बार भी अपने ट्विटर हैंडल पर अपने नाम के साथ भाजपा की जगह जनता का सेवक और क्रिकेट प्रेमी जोड़ दिया है।

जबकि उनके ट्विटर हैंडल से जुड़ हुए अनेक लोगों का कहना है कि सिंधिया ने अपने प्रोफाइल में भाजपा जोड़ा ही नहीं था, फिर उसे हटाने का सवाल ही कहां पैदा होता है। हालांकि इसपर भाजपा या सिंधिया की तरफ से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। अपनी राजनैतिक यात्रा शुरू करने के साथ ही कांग्रेस में बने रहने के बाद सिंधिया ने मार्च के महीने में भाजपा का दामन थामा था।

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पार्टी में उनके आने के बाद उनके समर्थकों को शिवराज मंत्रिमंडल में शामिल करने और उन्हें केंद्र में कैबिनेट मंत्री बनाए जाने की चर्चा थी। लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि उनके समर्थक पूर्व विधायकों को उपचुनाव का टिकट मिलने में परेशानी हो रही है। शिवराज चौहान की कैबिनेट को लेकर कई बार संभावित तारीखों का अनौपचारिक ऐलान किया गया, लेकिन कैबिनेट विस्तार नहीं हो पाया।

उल्टे प्रदेश संगठन के साथ मुख्यमंत्री ने संभावित मंत्रियों की जो लिस्ट तैयार की थी वह भी मीडिया में लीक हो गई या फिर सोची समझी रणनीति के तहत लीक कर दी गई। कारण यह भी गिनाए जा रहे हैं कि जैसे जैसे समय बीत रहा है, मोदी कैबिनेट में सिंधिया को शामिल करने की भी चर्चा अब कम होती जा रही है। दावा किया जा रहा है कि भाजपा ने उपचुनाव में सिंधिया समर्थक सभी 22 विधायकों को टिकट देने का वादा किया था।

लेकिन वर्तमान हालातों को देखकर कयास यही लगाए जा रही हैं कि अब भाजपा को इसमें परेशानी आ रही है। कई सीटों पर पार्टी को अपने पुराने नेताओं की बगावत देखने को मिल रही है। हाटपिपल्या में दीपक जोशी हों या ग्वालियर पूर्व से कांग्रेस में शामिल हो चुके बालेंदु शुक्ला, पार्टी के लिए अपने नेताओं को मनाना मुश्किल हो रहा है। कुछ सीटों पर सिंधिया समर्थक पूर्व विधायकों की जीत को लेकर संशय की बातें भी सामने आ रही हैं।

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दूसरी ओर इन सभी बातों को भारी पैमाने पर कोरी अफवाह करार दिया जा रहा है। क्यों कि इस बावत अभी तक सिंधिया या उनके समर्थकों की तरफ से किसी तरह के असंतोष की खबरें सामने नहीं आई हैं। अभी भी देखना यही उचित रहेगा कि श्री सिंधिया की ओर से कोई प्रतिक्रिया इस बावत आती है अथवा नहीं। वैसे भी सिंधिया सियासत केे मामले में बेहद अंतर्मुखी माने जाते हैं। वे जुबान तभी खोलते हैं, जब सियासी चौसर पर शतरंज की बिसात उनके हिसाब से बिछ चुकी होती है।

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