कोरोना से स्वस्थ्य होने वाले मरीजों में नहीं मिली एंटीबॉडी

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कोरोना से स्वस्थ्य होने वाले मरीजों में नहीं मिली एंटीबॉडी

सीरो सर्वे में चौंकाने वाला खुलासा, गंभीर स्थिति के हो सकते हैं संकेत

भोपाल। देश भर में चालू सेरो सर्वे को लेकर कई चायकाने वाली खबरें सामने आ रही हैं। इसी क्रम में इंदौर और उज्जैन की रिपोर्ट भी आ चुकी है, एक सप्ताह बाद भोपाल के नतीजे भी सामने आ जाएंगे। लेकिन इस सीरो सर्वे में जो चौंकाने वाली बात है वो यह कि जांच के दौरान कोरोना से स्वस्थ्य होने वाले कई मरीजों में एंटीबॉडी नहीं मिली। विशेषज्ञों की नजर में एंटीबॉडी का ना मिलना खासी गंभीर स्थिति के संकेत हो सकते हैं।

ऐसे में गांधी मेडिकल कॉलेज द्वारा कोरोना से ठीक हुए लोगों पर टेस्ट का एंटीबॉडी की स्थिति का पता लगाया जाएगा। राजधानी में कोरोना वायरस का संक्रमण लगातार बढ़ता जा रहा है। शहर में 24 घंटों में 307 नए मरीज मिले हैं। वहीं मरीजों की संख्या प्रदेश में एक लाख के पार हो गई। रोजाना ढाई हजार नए मामले सामने आ रहे हैं। एक ओर जहां संक्रमितों की संख्या लगातार बढ़़ रही है वहीं इलाज के बाद ठीक होने वालों की संख्या भी काफी है। वायरस के प्रसार को जानने के लिए प्रदेश में सीरो सर्वे चल रहा है।

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कोरोना नया वायरस है, इसकी ज्यादा जानकारी अब तक नहीं आई है। अब तक यह साबित नहीं हो सका है कि एंटीबॉडी कब तैयार होते हैं। सामान्य: शरीर में 14 दिनों में एंटीबॉडी बन जाते हैं, लेकिन कई ऐसे मामले सामने आए हैं जिसमें इनका निर्माण नहीं हुआ। हमीदिया अस्पताल के कुछ डॉक्टर और कर्मचारियों की जांच में टेस्ट के दौरान उनमें एंटीबॉडी नहीं मिले थे।

ऐसे डेवलप होती है एंटीबॉडी…

जब हमारे शरीर में कोई वायरस जाता है तो इम्युन सिस्टम एक्टिवेट हो जाता है और यह वायरस या इंफेक्शन को रोकने की प्रक्रिया शुरू कर देता है। इस दौरान अलग-अलग सेल्स मिलकर वायरस को बेअसर करने में लग जाती है। इन्हें एंटी-बॉडी कहा जाता है। ऐसा नहीं है कि ये एंटी-बॉडी काम करने के बाद खत्म हो जाती है। ये कुछ समय तक शरीर में मौजूद रहती हैं ताकि अगर वायरस दोबारा आए तो उससे लड़ा जा सके। यह दो तरह की होती हैं पहली आईजीएम एंटीबॉडी जो कुछ दिन को होती हैं। इनका निर्माण तुरंत हो जाता है। दूसरी आईजीबी एंटीबॉडी, जो 14 दिन बाद बनती हैं, लेकिन यह लंबे समय तक रहती हैं।

6 माह से सालभर तक होगी जांच

कॉलेज का पीसीएम डिपार्टमेंट इस रिसर्च का प्रस्ताव तैयार कर रहा है। जानकारी के मुताबिक इसमें शहर के अलग अलग हिस्सों में 1500 से 2000 लोगों को रेंडमली चयनित कर उनका एंटी बॉडी टेस्ट किया जाएग। यह टेस्ट ठीक होने के एक सप्ताह बाद से लेकर एक महीने बाद और नियमित अंतराल में करीब एक साल तक किए जाएंगे। टेस्ट की रिपोर्ट पता चलेगा कि सामान्यत: कोरोना के लिए एंटीबॉडी कब बनना शुरू हुए और कितने दिन तक रहते हैं।

इनका कहना है…

अभी इंदौर और उज्जैन में सीरो सर्वे के माध्यम से एंटीबॉडी का पता लगाया गया था। भोपाल में भी कोरोना वायरस के संक्रमण का प्रसार जानने के लिए कॉलेज की टीम लगातार सीरो सर्वे कर रही है। इसके साथ ही पीसीएम विभाग में अलग-अलग स्तर पर रिसर्च किए जा रहे हैं। आगे भी रिसर्च कर वायरस की प्रकृति के बारे में ज्यादा से ज्यादा जानकारी हासिल की जाएगी।
डॉ. आईडी चौरसिया, अधीक्षक, हमीदिया

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