खाली हाथ लौटे सीएम शिवराज

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फिर टल गया कैबिनेट का विस्तार

भोपाल। दो दिन तक दिल्ली में डेरा डालने के बाद अंतत: सीएम शिवराज सिंह खाली हाथ वापिस लौट आए हैं। इसी के साथ यह साफ हो गया है कि मध्य प्रदेश कैबिनेट का विचार एक बार फिर से टल गया है। यह मामला एक बार फिर क्यों टला, इसके पीछे सबके अपने अपने कयास हैं। लेकिन भरोसेमंद सूत्र बता रहे हैं कि प्रदेश और केंद्र के विचार कहीं न कहीं मेल नहीं खा रहे।

बताया जाता है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी ने जो आश्वासन ज्योतिरादित्य सिंधिया को दिया, वह शिवराज सिंह दवाबवश पूरा नहीं कर पा रहे हैं। शिवराज की मजबूरी यह है कि वे अपने वरिष्ठ और बर्षों से साथ रहे पुराने भाजपाइयों को कैसे नजरंदाज कर सकते हैं। जबकि गणित ये बन रहा है एक पक्ष का ध्यान रखो तो दूसरा छूट ही जाता है।

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हर बार जो सूची बनती है, वो कभी शीर्ष नेतृत्व द्वारा नकार दी जाती है। कभी प्रदेश नेतृत्व और पुराने मंत्री असहमत हो जाते हैं। जब इनके हिसाब से चलने का प्रयास होता है तो सिंधिया सर्मथकों की अनदेखी हो जाती है। चूंकि सिंधिया की भाजपा में आमद मोदी और शाह से विस्तृत बातचीत के बाद हुई है। जाहिर है, उन्होंने उस वक्त दोनेां ने सिंधिया से कुछ कसमें वादे भी किए होंगे।

बस दिल्ली कैबिनेट की सूची में उन्हीें कसमों और वादों की पूर्ति होते देखना चाहती है। सिंधिया भी ऐसे नेता नहीं हैं कि खुद राज्यसभा सांसद बनकर अपने साथ आए लोगों को अकेला छोड़ दें। जाहिर है, ऐसे में सीएम शिवराज सभी के मन की साध पूरी करने के प्रयास में लगे हुए हैं। लेकिन सभी के मन की साध कभी पूरी हुई है? जो अब होगी।

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