अम्मा साहेब के सेवाभाव को जीवंत रखने में संलग्र यशोधरा

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अम्मा साहेब के सेवाभाव, संलग्र यशोधरा, दरिद्र नारायण की सेवा

कुटिल राजनीत से इतर दरिद्र नारायण की सेवा में समर्पित व्यक्तित्व

प्रधान संपादक मोहन लाल मोदी की कलम से
अम्मा साहेब के सेवाभाव को जीवंत रखने में संलग्र यशोधरा राजे सिंधिया का नाम किसी भी परिचय का माहताज नहीं है। क्यों कि वे कुटिल राजनीति से इतर खुद को दरिद्र नारायण की सेवा में समर्पित बनाए रखती हैं। इस पुनीत कार्य में उन्हें संबल प्रदान करते हैं वे आदर्श, जो कैलाशवासी राजमाता साहब श्रीमंत विजयाराजे सिंधिया द्वारा अपने पुनीत कार्यों द्वारा स्थापित किए गए।

यदि अम्मा साहेब की बात करें तो उनका जीवन सदा ही जन सेवक होने के मानदंड स्थापित करता रहा। इसका प्रमाण यह कि वे सभी प्रकार के ऐश्वर्य और वैभव से सम्पन्न बनीं रहीं। चेहरे का तेज ऐसा कि सूर्य की किरणें भी भी उनका स्पर्श पाकर द्विगुणित प्रभा को प्राप्त हो जाया करती थीं। फिर भी उन्होंने अपने जीवन को आम आदमी के बीच होम कर दिया।

जब तक जीवित रहीं राष्ट्र सेवा को समर्पित रहे अम्मा साहेब के सेवाभाव

वे जब तक जीवित रहीं, राष्ट्रसेवा को समर्पित राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ, विश्व हिंदु परिषद, और ऐसे अनेक संगठनों से केवल जुड़ी ही नहीं रहीं, बल्कि उन्हें तन मन धन से यथा संभव सहायता उपलब्ध कराती रहीं। ये उनका राष्ट्र के प्रति असीमित स्नेह का ही परिचायक पहलू था कि स्वराज लागू होते ही भारत पर पड़ौसियों ने जुल्म ढाने का प्रयास किया तो उन्होंने ग्वालियर एस्टेट के खजाने देशहित में खोल दिए।

यही नहीं, अपनी संतान के समान प्रिय जनता के बीच झोली फैलाकर आ खड़ी हुईं। ये उनके प्रति आम आदमी का विश्वास ही तो था कि अल्प समय में अम्मा साहेब को कई कई बार सोने चांदी से तौल दिया गया। तत्पश्चात आश्वत भी किया गया कि अम्मा साहेब आप बार बार आना, हम अपने स्नेह से आपकी झोली भरते ही रहेंगे। ऐसे कई पहलू हैं, जिन्हें उजागर करने के लिए एक समूचा ग्रंथ लिखा जा सकता है।

मैं देश के स्थानीय उत्पादकों के निर्माण को प्रोत्साहन देने के लिए मिशन के रूप में कार्य करूंगी।। व यथासंभव लोकल…

Posted by Yashodhara Raje Scindia on Saturday, June 6, 2020

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मृत्यु पर्यंत जनसेवा में जुटी रहीं अम्मा साहेब ने अपने स्वस्थ जीवन को अलविदा भी जनता के बीच ही कहा। उनके बारे में यह नि:संकोच लिखा जा सकता है कि जब उन्होंने अंतिम बार चेतना त्यागी, तब तक वे एक कर्तव्यनिष्ठ सिपाही की तरह अपनी प्राणों से भी जयादा प्रिय भाजपा की विजय सुनिश्चित करने में जुटी हुई थीं।

उन्हीं की सबसे छोटी पुत्री और सबसे ज्यादा लाड़ली यशु, यानि कि श्रीमंत यशोधरा राजे सिंधिया अपनी अम्मा साहेब के जनसेवा कार्य को आगे बढ़ाने में संलग्र बनी हुई हैं। कुछ लोग उनके भीतर राजशाही का दर्प देखते होंगे, जो कि स्वाभाविक ही है। लेकिन ये तभी दृष्टव्य होता है, जब वे अपने समक्ष किसी व्यक्ति को लोकतांत्रिक और सामाजिक मर्यादाओं का उल्लंघन करते देखती हैं।

वर्ना तो उनका हृदय भी कैलाशवासी अम्मा साहेब की तरही अपने एक अदने से कार्यकर्ता के लिए भी किसी पुष्प से ज्यादा कोमल ओर अपनत्व से सुवासित है। यही वजह है कि वे गुना अशोक नगर शिवपुरी ग्वालियर दतिया चंबल आदि क्षेत्रों में सेवाभावी कार्यों को अंजाम देती ही रहती हैं। उनका सबसे ज्यादा ध्यान केंद्रित रहता है बेबस और बेसहारा वर्ग एवं खासकर महिलाओं, बच्चों पर।

बगैर किसी प्रचार प्रसार के चुपचारप दरिद्रनारायण की सेवा में संलग्र यशोधरा

यही वजह रही कि जब कोरोना का हमला देश पर हुआ तो यशोधरा राजे बगैर किसी प्रचार प्रसार के चुपचारप दरिद्रनारायण की सेवा में जुट गर्इं। राजमाता विजयाराजे सिंधिया चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से गरीबों को निरंतर भोजन कपड़ों के साथ साबुन, मास्क, सैनेटाईजर जैसी आवश्यक वस्तुएं उपलब्ध करा रही हैं।

यही नहीं, उन्होंने कोरोना योद्धा पुलिस, चिकित्सक, स्वास्थ्यकर्मी, सफाईकर्मी आदि वर्गों के लिए पीपीई किट मुहैया कराने का उद्यम भी अपना रखा है। इससे भी ज्यादा काबिले गौर बात ये है कि इन सभी परोपकारी कार्यों में राजे स्वयं को कभी केंद्र में नहीं रखतीं। एक ओर जहां दीगर राजनेता एक सेवफल दान करते वक्त भी फोटो प्रचारित कराने का अवसर छोडऩा नहींं चाहतेे।

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वहीं यशोधरा राजे द्वारा सभी प्रकार के परोपकारी कार्य ट्रस्ट में कार्यरत सेवाभावी और वेतनभोगी सेवादारों के हाथों से ही सम्पन्न कराए जाते रहते हैं। कैलाशवासी अम्मा साहेबी की लाड़ली यशु और हम सबकी आदरणीय दीदी साहेब, आत्या महाराज और राजे महाराज अपनी इसी निस्वार्थ सेवा भाव के चलते सभी की स्नेहपात्र बनी हुई हैं, यह स्वाभाविक जनाशीर्वाद नहीं तो और क्या है?

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